जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार आंदोलनों का वर्णन करें

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार आंदोलन

1855 ई. में रूस के जार निकोलस प्रथम की मृत्यु हो गई. इसके बद उसका पुत्र अलेक्जेंडर द्वितीय रूस का सम्राट बना. उसने अपने पिता के विपरीत उदारवादी शासन को अपनाया. उसने अपने पिता के द्वारा किए गए दमनकारी शासन के कारण उपजे जनता की असंतोष और अव्यवस्था को देखते हुए बहुत से सुधार करने के प्रयास किया.

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार
जार अलेक्जेंडर द्वितीय के द्वारा किए गए सुधार कार्य

1. दास प्रथा का अंत

इस समय रूस में दास व्यवस्था काफी चरम पर था 1860 ई. में रूस के जनसंख्या का लगभग आधा भाग आधी जनसंख्या अर्थात चार करोड़ लोग कृषि दास थे इनमें से दो करोड़ लोग राजकीय भूमि पर काम करने वाले दास थे. बागी 2 करोड़ दासों पर चर्च तथा कुलीन वर्गों का अधिकार था. रूस के सुधारवादियों के अनुसार जब तक रूस में से दास प्रथा को खत्म न किया जाए तब तक रूस का विकास संभव नहीं. अतः जान ने दास प्रथा को खत्म करने की दिशा में प्रयास करने लगा. इस संबंध में उसने 1856 ई. में एक घोषणापत्र प्रकाशित कराया. इस घोषणापत्र में उसने सबके लिए समान न्याय संबंधी कानूनों की आवश्यकता पर बल दिया.  19 फरवरी 1961 ई. को राजाज्ञा द्वारा कृषि-दासता समाप्त कर दिया गया. इसके बाद जार अलेक्जेंडर द्वितीय को मुक्तिदाता जार कहा जाने लगा. कृषि-दासत्व से स्वतंत्रता प्राप्त हो जाने के बाद कृषकों को स्वतंत्र आजीविका का साधन प्राप्त हो गया. कृषकों की दशा सुधारने से उनको समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त हो गया. बहुत से कृषक मिलों और फैक्ट्रियों में काम करने लगे. इसके बाद रूस का औद्योगिक विकास होना शुरू हो गया.

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार

2. न्याय व्यवस्था में सुधार

तत्कालीन शासन व्यवस्था के न्याय व्यवस्था में भेदभाव, भ्रष्टाचार आदि चरम पर थी. न्यायालय के न्यायाधीश कानूनों की उचित जानकारी नहीं रखते थे. इसी वजह से निष्पक्ष न्याय नहीं कर पाते थे. मुकदमे काफी लंबे समय तक चलते थे. ऐसे में लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता था. इन सब के कारण रूस के जार एलेग्जेंडर द्वितीय ने न्याय संबंधी सुधारों को करने की दिशा में प्रयास किया. उन्होंने सन 1858 ई. में विधि मंत्रालय के उच्च अधिकारियों की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया. इसके पश्चात सन 1862 ई. में आयोग द्वारा प्रस्तुत सुझावों के आधार पर एक नई एवं उन्नत न्याय प्रणाली लागू की. 

3. स्थानीय शासन में सुधार

जनवरी 1864 ई. में एक राजाज्ञा प्रकाशित की गई. इसके अनुसार स्थानीय शासन के लिए कई प्रशाससिक सुधार किए गए. प्रत्येक जिलों में दो नई स्थानीय परिषदों का गठन किया गया. ये परिषदें समाज के कृषक, कुलीन और व्यापारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती थी. सड़क एवं पुलों का जीर्णोद्धार करना, शिक्षा एवं सफाई की देखभाल एवं व्यवस्था करना, अकाल के समय व्यवस्था करना एवं स्थानीय झगड़ों का निपटारा करना आदि जिला एवं प्रांतीय परिषदों के कार्य क्षेत्र में दे दिए गए. इसके अलावा 1870 ई. में प्रत्येक नगरों में म्युनिसिपल काउंसिल का भी गठन किया गया.

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार

4. सेना में सुधार

1824 ई. में उन्होंने एक कानून पारित किया गया. इस कानून के अंतर्गत 20 वर्ष के नवयुवकों के लिए 6 वर्षीय सैन्य सेवा अनिवार्य घोषित कर दी गई. इसके अलावा सेना के विभिन्न विभागों की पुनर्गठन की गई और कई सुधार किए गए. इन सब सुधारों के परिणामस्वरूप रूस की सेना की क्षमता में निरंतर वृद्धि होती चली गई.

5. शिक्षा में सुधार

जार अलेक्जेंडर द्वितीय ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत से सुधार किए. उनहोंने 1864 ई. के एक अधिनियम के आधार पर विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों को प्राथमिक विद्द्यालय खोलने की अनुमति प्रदान की. विद्यालयों के प्रबंधनों में भी बहुत से सुधार किये. उनहोंने जार निकोलस के समय विश्वविद्यालयों पर लगाए प्रतिबन्धों को समाप्त कर दिया. 1870 ई. के बाद स्त्रियों को भी उच्च शिक्षा का भी अधिकार दिया.  

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार

6. आर्थिक सुधार

जार एलेग्जेंडर द्वितीय के द्वारा किए गए गए सुधारों के परिणामस्वरूप रूस में तेजी से औद्योगिकरण हुआ. परिणाम स्वरूप कारखानों की संख्या में वृद्धि होती गई और मशीनों का प्रयोग किया जाने लगा. 1861 ई. में व्यापार और उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए बैंक ऑफ रशिया के स्थापना की गई. 1860 ई. से 1870 ई. के दौरान रूस में विदेशी व्यापार काफी बढ़ गया. रेलवे के विस्तार से व्यापार और उद्योग में काफी प्रगति होती गई.

जार अलेक्जेंडर द्वितीय के सुधार आंदोलन

7. अन्य सुधार

इसके अलावा उन्होंने बहुत से अन्य सुधार भी किए. जार निकोलस शासन काल में निकोलस प्रथम के विरुद्ध विद्रोह करने के कारण साइबेरिया डिकोब्रिस्टो को जार ने मुक्त कर दिया. तमाम राजनीतिक बंदियों को आजाद कर दिए गए. विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता दी गई तथा प्रत्येक वर्ग के छात्रों को प्रवेश करने की सुविधाएं दी गई. विदेश यात्रा पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया गया. समाचार पत्र संबंधित प्रतिबंध के कठोर नियमों को उदार कर दिया गया. रेलवे तथा विदेश यात्री संबंधी सुधार में भी उदार नीति का परिचय दिया. 

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