प्लासी युद्ध के परिणामों का वर्णन करें | प्लासी के युद्ध का परिणाम क्या था?

प्लासी युद्ध

सैनिक दृष्टिकोण से प्लासी युद्ध का कोई विशेष महत्व नहीं है क्योंकि यह युद्ध सैन्य शक्ति नहीं बल्कि एक षड्यंत्र का सहारा लिया गया था. किंतु इसके परिणाम के दृष्टिकोण से प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास के महान युद्धों में की जाती है क्योंकि इसके प्रभाव स्थाई और दूरगामी सिद्ध हुए. इस युद्ध ने भारतीय इतिहास की धारा को ही मोड़ दिया. एडमिरल वाटसन ने इस युद्ध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लिखा कि प्लासी का युद्ध कंपनी के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य रूप से ब्रिटिश जाति के लिए असाधारण महत्व रखता है.

प्लासी युद्ध के परिणाम

प्लासी युद्ध के परिणाम

1. बंगाल पर अंग्रेजी नियंत्रण की स्थापना

प्लासी युद्ध के बाद बंगाल की सत्ता पर अंग्रेजों का वास्तविक अधिकार हो गया. मीरजाफर को को बंगाल का नया नवाब बनाया गया. लेकिन वह नाम मात्र का नवाब था. हकीकत में वह अंग्रेजों की कठपुतली मात्र था. अर्थात वह कंपनी इच्छा तक की गद्दी पर बना रह सकता था. यह तथ्य इस बात से प्रमाणित होता है कि जब कंपनी ने मीरकासिम को बंगाल का नवाब का बनाया था तो मीरजाफर ने गद्दी छोड़ दी.

प्लासी युद्ध के परिणाम

2. कंपनी को क्षेत्रीय लाभ

इस युद्ध के बाद कंपनी को आर्थिक क्षेत्र में  अनेक लाभ हुए. कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में स्वतंत्र रूप से व्यापार करने की छूट मिल गई. कोलकाता के निकट 24 परगना की जमींदारी भी उसे मिल गई. अतः कोलकाता स्थित अंग्रेजों की बस्ती काफी समृद्ध होने लगे. उनके व्यापार में भी काफी वृद्धि होती चली गई. मीरजाफर ने कलकत्ता पर आक्रमण करने के लिए एक करोड़ 77 लाख रुपये युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में कंपनी तथा शहर के व्यापारियों को दिए. कंपनी के बड़े अधिकारियों को भी नवाब ने घूस के रूप में काफी धनराशि दी. क्लाइव को 20 लाख रुपए से अधिक तथा व्हाट्सन को 20 लाख रुपए दिए. इस तरह नवाब का कुल तीन करोड़ से ज्यादा रुपया खर्च हुआ. इसके साथ-साथ ब्रिटिश व्यापारी तथा अधिकारी अपने निजी व्यापार के लिए चुंगी देने में हमेशा के लिए मुक्त हो गए.

प्लासी युद्ध के परिणाम

3. कंपनी के गौरव में वृद्धि

प्लासी के युद्ध में हुए इस जीत ने कंपनी के गौरव में अत्यंत वृद्धि कर दी. अब ईस्ट इंडिया कंपनी साधारण व्यापारिक कंपनी से उठकर एक ऐसी प्रभावशाली शक्ति बन गए जो शासकों का निर्माण और विनाश कर सकती थी. यही कारण था कि अब बहुत से भारतीय शासक और नागरिक कंपनी का आदर करने लगे थे.

4. दक्षिण में होने वाले अंगल फ्रांसीसी संघर्ष पर प्रभाव

बंगाल से प्राप्त धनराशि व अन्य संसाधनों की मदद से कंपनी ने एक शक्तिशाली सेना का गठन कर लिया. इस सेना ने दक्षिण में होने वाला आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष में एक निर्णायक भूमिका अदा की. बंगाल से क्लाइव ने कर्नल फोर्ड को दक्षिण भेजा और उसने फ्रांसीसियों से उत्तरी सरकार के क्षेत्रों को छीना. अंगल-फ्रांसीसी संघर्ष के तीसरे चरण में अंग्रेजों को भारी सफलता मिली. अंग्रेजों की इस सफलता में प्लासी के युद्ध विजय का सबसे बड़ा हाथ था.

प्लासी युद्ध के परिणाम

5. बंगाल में होने वाली क्रांतियों को पथ प्रदर्शन

प्लासी युद्ध के बाद बंगाल की गद्दी पर मीरजाफर को बैठाया गया. इसे इतिहासकारों ने बंगाल की प्रथम क्रांति कहा है. मीरजाफर ने इस कार्य के लिए कंपनी एवं उसके अधिकारियों को काफी धन दिया था. इस कारण कंपनी के अधिकारी एवं कंपनी बहुत लालची हो गई थी. अब क्लाइव के बंगाल से चले जाने के बाद कंपनी के अधिकारियों ने मीरजाफर की जगह उसके दामाद मीरकासिम को नवाब बनाने का निर्णय लिया. उसके पीछे धन का लालच था कि उसे बंगाल का नवाब बनने पर उन्हें फिर से धन मिलेगा. इस प्रकार प्लासी युद्ध में बंगाल की दूसरी क्रांति के बाद बक्सर के युद्ध को जन्म दिया.

6. भारत विजय का मार्ग प्रशस्त

प्लासी की विजय के बाद अंग्रेजों के अनुभव और शक्ति में काफी वृद्धि हुई. इससे उत्साहित होकर वे भारत के अन्य भागों में भी अपने प्रभाव को बढ़ाने के की दिशा में कोशिश करने लगे. अंग्रेजों को इस बात का एहसास हो चुका था कि सिराजुद्दौला की तरह भारत के अन्य शासकों को भी हराया जा सकता है.

प्लासी युद्ध के परिणाम

7. बंगाल का शोषण

प्लासी युद्ध के बाद भारत में अनंत अंधकार में रात्रि का आरंभ हो गया था. अब कंपनी तथा इसके कर्मचारियों के द्वारा बंगाल के लोगों का शोषण शुरू हो गया. वे मीरजाफर को सोने की एक बोरी के रूप में इस्तेमाल करने लगे कि जब इच्छा हो उसमें हाथ डाल दें और मनमर्जी धन निकाल लें. इस लालच में स्वयं कंपनी भी बच नहीं पाई थी. अंग्रेज बंगाल की खनिज संपदा का अपहरण करना चाहते थे. यही कारण है कि प्लासी युद्ध के बाद कंपनी के निवेशकों ने अपने भारतीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंगाल को भविष्य में बंबई और मद्रास प्रेसीडेंसी का खर्च वहन करना चाहिए. इसके अतिरिक्त यह भी आदेश दिया गया कि बंगाल के आमदनी से ही कंपनी के भारतीय निर्यातित मालों को खरीदना चाहिए. कंपनी को भारत से व्यापार ही नहीं करना था बल्कि बंगाल के नवाब पर स्थापित अपने नियंत्रण का इस्तेमाल प्रांत के संपदा को हथियाने में हथिया लेने के लिए भी करना था.

प्लासी युद्ध के परिणाम

8. नैतिक प्रभाव

प्लासी युद्ध ने बंगाल के नवाब तथा लोगों के हौसले समाप्त कर दी. उसमें निराशा की भावना उत्पन्न हो गया और स्वयं को असहाय समझने लगे. किसी भी राष्ट्र के लिए ये भावना प्राणघातक सिद्ध होती है. इस प्रकार प्लासी युद्ध से बंगाल अथवा भारत में ब्रिटिश सत्ता का मार्ग प्रशस्त हो गया. वास्तव में इस युद्ध में अंग्रेजों को बंगाल में अपने पैर जमाने के मौका दिए.

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