भारत पर तुर्क आक्रमणों का वर्णन कीजिए

भारत पर तुर्क आक्रमण

गजनी में पिरीतिगीन नामक तुर्क शासक के शासनकाल (972-977 ई.) के दौरान भारत पर पहला भारत पर तुर्क आक्रमण हुआ. इस दौरान पंजाब में एक शाही वंश का शासक जयपाल शासन कर रहा था. वह भारत में तुर्कों की बढ़ती हुई शक्ति और प्रभाव को रोकने के लिए उन पर आक्रमण करने की योजना बना रहा था. इसी बीच पिरीतिगीन के विरोधियों ने उससे सहायता मांगी. जयपाल ने उनकी सहायता करने का निश्चय किया और अपने पुत्र के नेतृत्व में एक विशाल सेना भेजी. इसी बीच सुबुक्तगीन जयपाल की शक्ति को अंकुश लगाने तथा पिरीतिगीन को अपदस्थ करने के उद्देश्य से जयपाल की सेना का सामना किया और उसे परास्त कर दिया. इसके बाद सुबुक्तगीन 977 ई. में गजनी के सिहासन अधिकार करने में सफल हो गया.

भारत पर तुर्क आक्रमणों का वर्णन कीजिए

सुबुक्तगीन के गजनी के शासक बनने के बाद उसकी बढ़ती शक्ति देकर पंजाब के शाही शासक जयपाल ने उसे कुचलने का प्रयास किया. उसने 986-87 ई. में अपनी विशाल सेना लेकर गजनी पर धावा बोला. लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी सेना को रास्ते में भीषण झंझावत झेलना पड़ा. इस वजह से उसकी सेना को अत्यधिक क्षति हुई और सुबुक्तगीन से परास्त होकर उसने संधि उसे संधि करनी पड़ गई. अपने राज्य पर लौटने पर जयपाल ने इन संधियों को मानने से इनकार कर दिया. अतः सुबुक्तगीन ने जयपाल पर आक्रमण कर लमगान पर अधिकार कर लिया और उसने उसे लूटा. जयपाल की मदद के लिए दिल्ली, अजमेर, कालिंजर, के राजाओं ने अपनी-अपनी सेनाएं भेजी. इसके बाद जयपाल में पुनः गजनी पर आक्रमण किया. लेकिन वह फिर से परास्त हो गया. इसके बाद तुर्को ने लमगान से लेकर पेशावर के बीच के समस्त भूभाग पर अधिकार कर लिया.

997 ई. में सुबुक्तगीन की मृत्यु के बाद उसके नियुक्त उत्तराधिकारी इस्माइल को परास्त कर उसके अन्य बेटा महमूद ने 998 ई. में सिंहासन पर अधिकार कर लिया. महमूद एक अत्यंत कुशल सेनापति और योद्धा था. उसने सन 1000 ई. में भारत पर पहला आक्रमण किया तथा पेशावर के कुछ भागों में अपना अधिकार कर वापस अपने देश चला गया. महमूद के वापस लौटने के बाद अपनी सैन्य तैयारी में लगा रहा. फिर उन्होंने भारत पर आक्रमण करना शुरू कर दिया.

भारत पर तुर्क आक्रमण

भारत पर महमूद के द्वारा आक्रमण (भारत पर तुर्क आक्रमण) किए गए घटनाएं:

1. जयपाल पर आक्रमण

महमूद में अत्यधिक सैन्य तैयारी करने के बाद 1001 ई. में पंजाब के शाही शासक जयपाल पर आक्रमण किया. इस युद्ध में जयपाल की पराजय हुई और उसे बंदी बना दिया गया. जयपाल सिंह ने बहुत सारा धन देकर खुद को आजाद कराया. लेकिन वह अपनी अपमान को सहन नहीं कर पाया. इसी कारण 1002 ई. में उन्होंने आत्महत्या कर लिया.

2. भटिंडा पर महमूद का आक्रमण

इसके पश्चात महमूद ने सन 1004 ई. से 1005 ई. के बीच में भटिंडा पर आक्रमण किया. भटिंडा के शासक ने बाजीराव ने अत्यंत वीरता पूर्व महमूद की सेना का सामना किया. दोनों ओर से भीषण संघर्ष हुआ. महमूद ने किसी तरह बाजीराव को परास्त कर भटिंडा पर अधिकार कर लिया. इस हार की वजह से बाजीराव ने आत्महत्या कर ली. महमूद ने भटिंडा पर काफी अत्याचार और लूटपाट किए.

3. मुल्तान पर आक्रमण

मुल्तान में तत्कालीन शासक दाऊद था. दाऊद के सिया होने के कारण महमूद से उसकी बनती नहीं थी. अत: दाऊद ने महमूद की सेना को अपने राज्य से निकलने की अनुमति नहीं दी. इस कारण महमूद ने 905-6 ई. में मुल्तान से आक्रमण कर उसे परास्त किया.

भारत पर तुर्क आक्रमण

4. आनंदपाल पर महमूद का आक्रमण

पंजाब के शाही शासक जयपाल द्वारा अग्नि में जलकर आत्महत्या करने के पश्चात उसका पुत्र आनंदपाल शासक बना. महमूद में आनंदपाल पर भी हमले करने का निश्चय किया और भाटिया के किले पर आक्रमण कर वहां के शासक विजय राज को परास्त किया. इसके पश्चात महमूद ने आनंदपाल पर आक्रमण करके उसके राज्य को लूटा. 1008 ई. में पुनः महमूद ने आनंदपाल पर आक्रमण किया. इसकी वजह से महमूद के सामना करने के लिए अनेक भारतीय राजाओं ने महमूद का सामना करने के लिए आनंद पाल के साथ मिलकर एक संघ बनाया. इस संघ में मुख्य रूप से उज्जैन, ग्वालियर, कलिंग, कन्नौज, दिल्ली, अजमेर, के राजा प्रमुख थे. मुल्तान के शासक दाऊद और खोखर ने भी आनंदपाल का साथ दिय. इस संघ और महमूद के सेना के बीच में भीषण संघर्ष हुआ. लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार भी संघ की सेना की बुरी तरह पराजय हुई.

5. त्रिलोचन पर आक्रमण

1012 ई. में आनंदपाल की मृत्यु के बाद त्रिलोचन पंजाब का शासक बना. त्रिलोचन पर भी महमूद अनेक आक्रमण किए. 1013-14 ई. में महमूद नंदन का दुर्ग जीत कर त्रिलोचनपाल को कश्मीर भागने प्रवेश किया. कश्मीर के राजा संग्राम सिंह की सहायता से त्रिलोचन ने पुन: महमूद के सामना किया किंतु फिर से वह परास्त हो गया.

भारत पर तुर्क आक्रमण

6. मथुरा पर आक्रमण

1018 ई. में महमूद ने बुलंदशहर पर अधिकार किया. फिर मथुरा पर आक्रमण किया. मथुरा में मंदिरों की भव्यता देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया. उसने मथुरा पर अधिकार करने के बाद मंदिरों को तोड़ा और वहां से अपार संपत्ति को लूटा.

7. सोमनाथ आक्रमण

महमूद के भारत प्रमुख आक्रमण सोमनाथ पर हुआ. सोमनाथ के शिव मंदिर में अकूत संपत्ति थी जिसे महमूद लूटना चाहता था. अत: उसने 1025 ई. में अन्हिलवाड़ पर आक्रमण किया. इसके पश्चात उन्होंने सोमनाथ पर आक्रमण किया. उसने सोमनाथ की मूर्ति तोड़ डाली और अपार संपत्ति को लूट लिया.

भारत पर तुर्क आक्रमण

8. जाटों पर आक्रमण

महमूद जब सोमनाथ से लूटी हुई संपत्ति लेकर लौट रहा था. रास्ते में जाटों ने उसे बहुत परेशान किया था. उसने उनसे बदला लेने के लिए 1027 ई. में सिंधु नदी और मुल्तान के निकट जाटों पर आक्रमण कर उन्हें परास्त किया. 

महमूद के द्वारा भारत अभियान के दौरान और भी अन्य बहुत सारे हमले किए. उन्होंने बहुत से नगरों को लूटा, मंदिरों को तोड़ा ,और उनसे अकूत संपत्तियों को लूटा. उन्होंने कन्नौज, चंदेल, पंजाब आदि पर भी आक्रमण करके उन्हें लूटा. उन्होंने पंजाब को अपना साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बना लिया था. जाटों पर आक्रमण करना महमूद की भारत पर अंतिम आक्रमण  था. 1030 ई. में महमूद की मृत्यु हो गई. इतिहासकारों का मानना है कि लालची किस्म था. भारत पर भारत पर तुर्क आक्रमण धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि धन की लालच के कारण हुए.

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