इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप का वर्णन करें

इतिहास का अर्थ

इतिहास शब्द की उत्पत्ति इति-ह-आस, इन तीनों शब्दों से मानी जाती है. इन तीनों शब्दों का अर्थ है- निश्चित रूप से ऐसा हुआ. वहीं दूसरी ओर जर्मन शब्द गेस्चिचटे (Geschichte) से भी इतिहास शब्द की उत्पत्ति मानी जाती है. इस शब्द का अर्थ है:- विगत घटनाओं का विशेष एवं बोधगम्य विवरण. इस प्रकार इन शब्दों के अर्थ से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि जिन वृतांतों को विश्वास के साथ प्रमाणित किया जा सके, वह इतिहास में आ जाते हैं. दूसरे शब्दों में महत्वपूर्ण तथ्यों को चुनकर अतीत का पुनर्निर्माण करने को ही इतिहास कहते हैं.

इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप
इतिहास का स्वरूप

इतिहास के स्वरूप को समझने के लिए सबसे पहले इतिहास के क्षेत्र के प्रमुख निर्धारित तत्वों का अध्ययन करना आवश्यक है. ओसवाल्ड स्पैंगलर ने संस्कृतियों के अध्ययन तक इतिहास के अध्ययन की सीमा रेखा खींची है. टायन्बी ने संस्कृति एवं सभ्यता के अध्ययन को इस प्रकार इतिहास के क्षेत्र में परिभाषित किया कि उसका स्वरूप अत्यंत ही विस्तृत हो गया. जॉन लिवी के अनुसार इतिहास के क्षेत्र का स्वरूप निरंतर परिवर्तनशील है. यह सामाजिक आवश्यकतानुसार विकसित होता रहता है. लिवी का यह कथन अत्यंत ही सार्थक प्रतीत होता है. यही कारण है कि जिस इतिहास चिंतन का उद्गम ज्ञान की प्राप्ति या अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए हुआ था, वही महाकाव्य युग में हेरोडोटस की दृष्टि में सामाजिक आवश्यकता की कहानी था. यही नहीं जब मध्य युग में धर्म की प्रधानता थी, तब सैंट आगस्टस ने संपूर्ण विश्व को ईश्वर का नगर कह कर संबोधित किया, तो वही वैज्ञानिक युग में सामाजिक आवश्यकता ने ब्यूरी को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि “इतिहास विज्ञान है ना कम और अधिक.” वास्तव में यदि ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि अतीत कालिक समाज का पूर्ण चित्रण करना ही इतिहास का मूल उद्देश्य है.

इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप

किसी भी समाज से संबंधित आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, भौगोलिक, धार्मिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक, संवैधानिक, सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं एवं परिवेश आदि विभिन्न स्थितियों का आकलन इतिहास में आवश्यक है. समाज से संबंधित प्रत्येक पहलू के प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर योजना इतिहासकार के लिए अत्यंत कठिन है. इतिहास के वर्गीकरण एवं विषय वस्तु का क्षेत्र विस्तार की दृष्टि से अध्ययन करने के पश्चात इतिहास के निम्नलिखित प्रकार सामने आते हैं:- राजनीतिक इतिहास, विधिक या संवैधानिक इतिहास, सामाजिक इतिहास, आर्थिक इतिहास, राजनयिक इतिहास, धार्मिक इतिहास, संस्कृति इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, औपनिवेशिक इतिहास, कॉमनवल्थ का इतिहास, सैनिक इतिहास, बौद्धिक इतिहास, विचारों का इतिहास, दार्शनिक इतिहास, मानव स्वतंत्रता का इतिहास, मानव प्रगति का इतिहास तथा विश्व इतिहास.

इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप

इस प्रकार इतिहास के विभिन्न प्रकारों को दृष्टिगत रखते हुए इतिहास के विभिन्न क्षेत्रों का आकलन करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इतिहास के क्षेत्र दिन-प्रतिदिन विकसित होता जा रहा है. अत: इनको पूर्ण रूप से अध्ययन करना कठिन है.

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1 thought on “इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप का वर्णन करें”

  1. मानव जीवन में इतिहास की उपयोगिता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए/

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