प्लासी युद्ध का महत्व क्या है?

प्लासी युद्ध का महत्व

प्लासी युद्ध का कोई सामरिक महत्व नहीं था. दरअसल यह एक छोटी सी झड़प थी. जिसमें कंपनी के कुल 65 व्यक्ति तथा नवाब के 5000 लोग शामिल थे. अंग्रेजों ने इस युद्ध में किसी विशेष सामरिक रणनीति तथा वीरता का प्रदर्शन नहीं किया. नवाब के साथियों ने उसके साथ विश्वास घात किया. मीर मदान के वीरगति प्राप्त करने के बाद विश्वासघातियों का प्रभाव बढ़ गया. यदि मीर जाफर तथा रायदुर्लभ विश्वासघात नहीं करते तो युद्ध का परिणाम कुछ और होता.

क्लाइव कूटनीति में काफी दक्ष था. उसने जगत सेठ को डर दिखाया और मीर जाफर को महत्वाकांक्षों को जगाया और बिना लड़े ही यह युद्ध जीत लिया. के. एम. पन्निकर के अनुसार यह एक सौदा था जिसने बंगाल के धनी सेठों तथा मीर जाफर ने नवाब को अंग्रेजों के हाथ बेच डाला.

प्लासी युद्ध का महत्व

प्लासी का युद्ध केवल उसके बाद होने वाली घटनाओं के कारण ही महत्वपूर्ण है. इस युद्ध के बाद बंगाल अंग्रेजों के अधीन हो गया और फिर कभी स्वतंत्र नहीं हो सका. नया नवाब मीर जाफर अपनी सुरक्षा तथा और शक्ति के लिए अंग्रेजों पर ही निर्भर था. अंग्रेजी सेना के लगभग 6000 सैनिक उसकी रक्षा करने के लिए बंगाल में तैनात थी. धीरे-धीरे बंगाल की समस्त शक्ति कंपनी के हाथों में चली गई. मीर जाफर की असमर्थता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वह दीवान राय दुर्लभ तथा रामनारायण को उनके विश्वास घात के लिए दंडित करना चाहता था, परंतु कंपनी के दबाव के कारण नहीं कर पाया. बंगाल पर अंग्रेज रेजिडेंट श्री वाट्स का विशेष प्रभाव था. मुसलमान इतिहासकार गुलाम हुसैन लिखता है कि पदोन्नति के लिए केवल अंग्रेजों का समर्थन आवश्यक था. शीघ्र ही मीर जाफर अंग्रेजों के बढ़ती दबाव से परेशान हो गया. अतः उसने डचों के साथ मिलकर अंग्रेजों को बाहर निकलने का षड्यंत्र रचने लगा. क्लाइव को इस षड्यंत्र का पता चल गया और नवंबर 1759 ई. में हुए युद्ध में उसने डचों को परास्त कर दिया. जब मीर जाफर ने अंग्रेजों के सामने झुकने से इनकार कर दिया इस कारण उसे 1760. ई में कंपनी के द्वारा नियुक्त व्यक्ति और मीर कासिम के लिए स्थान छोड़ना पड़ा.

प्लासी युद्ध का महत्व

प्लासी की युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद अंग्रेजों के लिए भारत को लूटने के सारे दरवाजे खुल गए. इस के कारण अंग्रेज जल्द ही अनंत धन का स्वामी बन गए. पहली किस्त जो अंग्रेजों को मिली वह 8 लाख पाउंड की थी जो चांदी के सिक्कों के रूप में ही थी. मैकेले के अनुसार यह धन कोलकाता से 100 से अधिक नावों में भरकर लाया गया. बंगाल उस समय भारत का सबसे धन सम्पदा वाला प्रान्त था और उद्योग तथा व्यापार में भी सबसे आगे था. 1767 ई. में बेरेलस्ट ने लिखा था कि बंगाल समस्त भारत का व्यापारिक केंद्र है, जहां सारा धन खिंचा चला आता है. यहां की बनी वस्तुएं भारत के दूरस्थ प्रदेशों में बिकती है. बंगाल के अनंत धन की सहायता से अंग्रेजों ने ढक्कन पर विजय प्राप्त कर लिया और उत्तरी भारत को भी अपने प्रभाव में ले आए.

प्लासी युद्ध का महत्व

कंपनी का स्थिति का जल्दी की कायाकल्प होता चला गया. पहले कंपनी को व्यापार करने के लिए बंगाल के नवाब के अधिकारियों को धन देना पड़ता था. अब बंगाल के व्यापार पर उसका एकाधिकार हो गया. फ्रांस को अपनी खोई हुई स्थिति को पुन: प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला. 1959 ई. में डचों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पाने प्रयत्न किया पर उनको मुँह की खानी पड़ी. इसके बाद अंग्रेज व्यापार के अधिकार से राजनीतिक एकाधिकार की ओर बढ़े.

प्लासी युद्ध का महत्व

भारत के भाग्य पर प्लासी युद्ध का अत्यधिक प्रभाव पड़ा. मालेसन के अनुसार संभवत: विश्व के इतिहास में इतना प्रभावित करने वाला युद्ध कभी नहीं लड़ा गया क्योंकि इस युद्ध के कारण इंग्लैंड आगे चलकर संसार का सबसे बड़ी शक्ति बन गया. प्लासी के युद्ध के कारण इंग्लैंड पूर्वी समस्या पर विशेष भूमिका निभाने लगा. प्लासी का युद्ध निश्चय ही अंग्रेजों के लिए सम्पूर्ण भारत पर अधिकार प्राप्त करने की श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थी.

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