राजपूत काल में महिलाओं की स्थिति का वर्णन करें

राजपूत काल में महिलाओं की स्थिति

राजपूत काल के आरंभ के समय भारत में स्त्रियों की दशा अच्छी थी. उनका सम्मान किया जाता था. लेकिन इसके बाद इनकी दशा गिरती चली गई. राजपूत काल के साहित्यों से पता चलता है कि इस समय स्त्रियों की दशा बहुत ही खराब थी. पुत्रों की तुलना में लड़कियों को कम महत्व दी जाती थी. लड़कियों की शिक्षा केवल राजकीय परिवार तथा धनी परिवार तक ही सीमित थी. लड़कियों को संगीत, नृत्य, चित्र कला और साहित्य की शिक्षा दी जाती थी. राजपरिवार की कन्याओं को अस्त्र-शस्त्र और घुड़सवारी की भी शिक्षा दी जाती थी.

राजपूत काल में महिलाओं की स्थिति

इस समय पर्दा प्रथा बहुत ही कम था. ये कुछ ही परिवारों तक सीमित थी. ज्यादातर स्त्रियां पर्दा नहीं करती थी. ज्यादातर लड़कियों का विवाह जवान होने से पहले ही कर दिए जाते थे. विधवाओं की स्थिति में अत्यंत दयनीय थे. उनके ऊपर अनेक प्रतिबंध लगाए जाते थे. राजपूत का काल में सती प्रथा का प्रचलन था, लेकिन यह प्रथा राज परिवारों तक ही सीमित हुआ करती थी. सुलेमान के अनुसार स्त्रियां स्वेच्छा से सती होती थी. इस काल में बाल हत्या का भी प्रचलन था लेकिन बाल हत्या से राजपूत परिवारों तक की सीमित थी. राजपूत काल में स्त्रियों को भोग-विलास की वस्तुएं समझी जाती थी. इस काल के साहित्यों से ज्ञात होता है कि तत्कालीन समाज में वेश्याएं भी होती थी.

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