विजयनगर साम्राज्य की सामाजिक स्थिति का वर्णन करें

विजयनगर साम्राज्य

प्राचीन काल में विदेशी यात्री अक्सर भारत की यात्राएं किया करते थे. उन्होंने अपने यात्रा वृतांतों में भारत के विभिन्न बातों का अध्ययन करके अपने जीवनी तथा लेखों में वर्णन किया है. इसी प्रकार विजयनगर साम्राज्य के बारे में भी अनेक लेखकों ने अपने लेखों में वर्णन किया है.

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विजयनगर साम्राज्य की तत्कालीन विशेषताएं

1. वर्ण व्यवस्था

विजयनगर साम्राज्य के तत्कालीन समाज वर्ण व्यवस्था पर आधारित थी. जनता मुख्य रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों में वर्गीकृत थे. समाज में ब्राह्मणों का स्थान सबसे ऊंचा था. शासन व्यवस्था चलाने में भी ब्राह्मणों की विशेष राय ली जाती थी. ब्राह्मण मुख्य रूप से वेदों पाठ करते थे और जरूरत पड़ने पर उनकी नियुक्ति सेना के उच्च पदों पर भी की जाती थी. ब्राह्मण व्यापार भी करते थे. राजा कृष्णदेव राय ने ब्राह्मणों की सहायता के लिए जनता पर एक नया कर भी लगाया था. राजनीतिक सत्ता का नियंत्रण क्षत्रियों के हाथों में थी. सेना में क्षत्रियों को ही लिया जाता था. समाज में इनकी काफी आदर और सम्मान होती थी. वैश्य समुदाय व्यापार करते थे इनका मुख्य व्यापार कृषि था.

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2. खान-पान

ब्राह्मणों को छोड़कर अन्य जातयों के लिए खानपान पर कोई प्रतिबंध नहीं था. राजा तथा जनता मांसाहारी थी. वे गाय और बैल को छोड़कर लगभग सभी प्रकार के गोश्त खाया करते थे. वह चूहे तथा बिल्लियों का भी मांस खाते थे. इसके अलावा चावल-दाल और विभिन्न प्रकार के अनाज, फल-फूल और सब्जियां भोजन के रूप में इस्तेमाल करते थे.

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3. स्त्रियों की दशा

समाज में स्त्रियों को उच्च स्थान प्राप्त था. उनको शिक्षा प्राप्त करने के लिए विशेष सुविधाएं मिली हुई थी. शासन के उच्च पदों पर भी उनकी नियुक्ति की जाती थी. इस समय पर्दा-प्रथा प्रचलित नहीं थी. स्त्रियां, पुरुषों के साथ मिलकर सामाजिक उत्सवों तथा युद्धों में भाग लेती थी. विजयनगर साम्राज्य में विधवा विवाह का प्रचलन नहीं था. इस समय विधवाओं का जीवन पाप युक्त माना जाता था. इसलिए वे अपने पति की मृत्यु के बाद सती हो जाया करती थी. समाज में वेश्याएं भी होती थी. राजा कृष्णदेव राय ने स्त्रियों के लिए अलग गणिका नगर बसाया था.

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4. मनोरंजन का साधन

इस समय मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के संसाधन हुआ करते थे. साधारण जनता मनोरंजन के लिए पशु-पक्षियों की लड़ाई देखती थी. शिकार भी मनोरंजन का एक प्रमुख साधन था. इसके अलावा बसंत उत्सव तथा अनेक हिंदू त्योहार भी होते थे. होली, दशहरा, रामनवमी, आदि धार्मिक त्योहार भी होते थे. शासक वर्गों का मनोरंजन का साधन शतरंज हुआ करता था.

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