हीनयान और महायान
प्रारंभ में बौद्ध धर्म की कोई शाखा नहीं थी. गौतम बुद्ध के द्वारा स्थापित धर्म ही बौद्ध धर्म का मूल धर्म थी. लेकिन ई. पू. प्रथम शताब्दी में बौद्ध धर्म दो शाखाओं में बट गया. इन शाखाओं को हीनयान और महायान के नाम से जाना जाता है. गौतम बुद्ध के द्वारा स्थापित मूल धर्म को हीनयान कहा जाता है. उस से ही टूट कर महायान का उदय हुआ. चूंकि बौद्ध धर्म के दोनों शाखाओं का मूल एक ही है लेकिन फिर भी दोनों संप्रदाय में कई असमानताएं हैं.
हीनयान और महायान में अंतर:-
- हीनयान महात्मा बुद्ध के द्वारा स्थापित की गई मूल बौद्ध धर्म था जबकि महायान, हीनयान का संशोधित और परिवर्तित रूप था.
- हीनयान सिर्फ महात्मा बुद्ध के उपदेशों को मानता था जबकि महायान में बुद्ध की शिक्षाओं के अतिरिक्त बोधिसत्व की शिक्षाएं भी शामिल की गई है.
- हीनयान की अपेक्षा महायान का कार्य क्षेत्र काफी विस्तृत है. हीनयान का उद्देश्य व्यक्ति विशेष को निर्वाण प्राप्त कर आना था, जबकि महायान का लक्ष्य संपूर्ण विश्व को निर्वाण दिलाना था.
- हीनयान एक दार्शनिक सिद्धांत है, जबकि महायान एक धर्म है. हीनयान अपरिवर्तनशील और नीरस है. महायान, हीनयान का विकसित रूप है.
- हीनयान में महात्मा बुद्ध को एक महापुरुष के रूप में जाना जाता है, लेकिन महायान में महात्मा बुद्ध को देवता का प्रतिरूप समझा जाता है.
- नयान में मूर्ति उपासना निषेध है, जबकि महायान में गौतम बुद्ध की मूर्ति की पूजा की जाती है.
- हीनयान में पाली भाषा का प्रयोग किया जाता था, लेकिन महायान संस्कृति भाषा को अपना धर्म प्रचार का माध्यम बनाया.
- महायान बोधिसत्व में विश्वास रखता है. इसी कारण से महायान को बोधिसत्व का धर्म भी कहा जाता है, जबकि हीनयान में बोधिसत्व का कोई विश्वास ना था.
- हीनयान का सिद्धांत कठोर है. हीनयान के अंतर्गत निर्वाण प्राप्त करने के लिए आर्य, सत्य व अष्टांगिक मार्ग पालन करना आवश्यक था. हीनयान शुष्क व सिद्धांतपरक तथा मुख्यतया: सन्यासियों के लिए था. वहीं महायान, सरल, सुगम तथा जनसाधारण के अनुकूल है.
- हीनयान का लक्ष्य अहर्त प्राप्ति है. अहर्त का तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो अपनी इच्छाओं का दमन कर के जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता और निर्वाण प्राप्त कर लेता है, किंतु अपने ज्ञान का प्रचार नहीं करता है. वहीं महायान बोधिसत्व को अपना आदर्श मानते थे.
- हीनयान में सभी के लिए एक उद्देश है, किंतु महायान में साधारण शिष्यों के लिए प्रकट उपदेश और अधिक योग्य शिष्यों के लिए गुह्या उपदेश थे.
- हीनयान सन्यासी जीवन पर बल देता है जबकि महायान गृहस्थ जीवन पर बल देता है.
- महायान करुणा तथा हीनयान ज्ञान प्रधान है.
- हीनयान की अपेक्षा महायान अधिक आशावादी है.
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